जंगल में नशे की खेती रोकने अब ड्रोन करेगा निगहबानी

पटना। बिहार और झारखंड प्रदेश से लगे जंगलों में अफीम की खेती रोकने के लिए अब आसमान से भी नजर रखने का प्लान तैयार कर लिया गया है। इसके लिए अब ड्रोन द्वारा आकाश से जंगल के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने की योजना बनाई गई है। पिछले दिनों सशस्त्र सीमा बल 29वीं वाहिनी एवं वन विभाग बाराचटटी के द्वारा संयुक्त रूप से झारखंड से सटे बुमेर एवं जयगीर पंचायत के जंगलों में ड्रोन की मदद से अफीम की खेती पर नकेल को लेकर निगरानी की गई।

ऐसा बताया जाता है कि नक्सली इस तरह की खेती मादक पदार्थों के माफियाओं को संरक्षण देकर करवाते हैं। नक्सलियों के भय से लोग इसका विरोध नहीं कर पाते। वन विभाग की जमीन का ज्यादातर तौर पर उपयोग किया जाता है। वहीं ग्रामीणों के खेतों में भी अफीम के फसल लगा दिए जाते हैं।

संयुक्त टीम ने की निगरानी-

आला अधिकारियों के निर्देश के बाद गत दिवस सहायक कमांडेंट एवं बाराचट्टी रेंजर ने संयुक्त रूप से टीम से टीम गठित कर ड्रोन से निगरानी की। मालूम हो कि झारखंड से सटे इलाकों में सैकड़ों एकड़ भूमि पर हालिया सालों में अफीम की फसल लगाई जाती रही है, जिसे लेकर प्रशासन को काफी फजीहत झेलनी पड़ती है और इस मादक पदार्थ के फसल को नष्ट करने के लिए कई दिनों का अभियान भी चलाना पड़ता है। इसके बावजूद अफीम की फसल को पूरी तरह से नष्ट करने में सफलता नहीं मिलती है। दो-तीन माह में उगाई गई फसल सालों भर यहां से देश भर के कई राज्यों में तस्करी किए जाते हैं।