सुकमा समाचार : गोठानों में चारागाह बनने से हुई पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था

सुकमा : गोठानों में चारागाह बनने से हुई पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था

CG News / गांवों में बने गोठान जहां आंवारा पशुओं की आश्रयस्थली बन गए हैं, वहीं यहां बनाए गए चारागाहों से पशुओं को पौष्टिक हरा चारा भी मिल रहा है। सुकमा जिले में अब तक 40 गोठानों का निर्माण पूरा हो चुका है। इनमें डेढ़ लाख नेपियर रुट लगाई जा रही है, जिससे पशुओं को आसानी से हरा चारा उपलब्ध हो सके।

गोचर भूमि के अतिक्रमण होने के कारण पशुधन को हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पाता था, जिसके कारण पशुओं व्दारा फसलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। इस गंभीर समस्या से किसानों को हो रहे नुकसान से बचाने एवं पशुधन को हरा चारा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार व्दारा सुराजी गाॅंव योजना अन्तर्गत नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना संचालित की जा रही है। योजना अंतर्गत गौठान निर्माण किया जा रहा है, जिसमें चारागाह का निर्माण भी किया जा रहा है। चारागाह हेतु आरक्षित भूमि को तार या बाड़ा फेंसिंग कर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है, जिससे चारागाह में हरा चारा जैसे- नेपियर, फसल का विकास किया जा सके।गौठान में चाॅफ कटर की भी व्यवस्था की जा रही है, जिससे चारा का समुचित उपयोग हो सके। चारागाह में उत्पादित हरे चारे की कटाई कर गौठानों में आने वाले पशुओं का हरा चारा उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य है।

डाॅ.एस.जहीरूद्दीन (उपसंचालक) पशुधन विकास विभाग सुकमा ने बताया कि नेपियर घास को लगाने के बाद पशुआंे को पूरे वर्ष भर हरा चारा उपलब्ध होगा। इस घास की रोपाई के बाद एक से डेढ़ महीनों में हरा चारा उपलब्ध हो सकेगा। इस घास से करीब 5 वर्ष तक हरा चारा उपलब्ध रहता है। इस घास में रसीलापन, घनी पत्तियाॅं उच्च प्रोटीन कार्बोहाईड्रेट रहता है। इसका उत्पादन प्रति हेक्टेयर 100 से 160 टन होता है। नेपियर घास प्रथम कटाई के लिए बुआई के लगभग 70 दिन पश्चात् तैयार होता है तथा इसके 35-45 दिन के अंतराल में कटाई की जाती है। पौधे जमीन से लगभग 8 से 10 सेमी की ऊंचाई से काटी जाती हैं। नेपियर घास में प्रतिवर्ष 6 से 7 कटाई मिलती है। पशुओं को हरा चारा उपलब्ध कराने की दृष्टि से गोठानों के पास चारागाह स्थल कर चयन कर नेपियर रूट निःशुल्क रोपणी गोठानों में महिला स्व.सहायता समूह व्दारा किया जा रहा हेै, ताकि पशुओं को नियमित रूप से हरा चारा उपलब्ध हो सके। यह हरा चारा पशु प्रजनन प्रक्षेत्र चंदखुरी रायपुर से प्राप्त कर रोपण की कार्यवाही प्रत्येक गौठान में की जा रही है।